सुनाते हुए
तीन शेर
अजीब हाल में रहने लगे थके से क़दम,
मलाल दिल को रहा आबले छुपाते हुए..
कभी हुआ ही नहीं हमसे जिन ग़मों का हिसाब,
ज़माना रोने लगा वो सफ़हे गिनाते हुए,
जो चाहता था मिरी रूह से बातें करना,
वो रो पड़ा था मुझे मर्सिया सुनाते हुए,
उर्मिला माधव,
7.12 2017
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