शबनमी रातों से

शबनमी रातों से दिल घबरा गया,
और ज़ेहन पर एक कुहासा छा गया,

दूरियां हमने मुक़म्मल कर तो लीं,
दम-ब-दम मुंह को कलेजा आ गया,
उर्मिला माधव

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