मुद्दआ नहीं आएगा

 है ये मेरा तेरा मुआमला, कोई दूसरा नहीं आएगा,
जहां सिर्फ़ दिल का विसाल है,
कोई मुद्दआ नहीं आएगा,

मुझे कब किसीसे गिला हुआ
मेरा घर है ग़म के पड़ोस में
मुझे ग़म ने कर दी है इत्तिला,
कोई ज़लज़ला नहीं आएगा,
उर्मिला माधव

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