जीवन की चाल

जब जीवन की चाल बदलने लगती है,
भीतर-भीतर आग सी जलने लगती है,
मूर्ख से लगने लगते हैं सब हम जैसे, 
दुनियां हमसें बात बदलने लगती है,

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