पड़ता है
हर इक के बिन सब कुछ ढोना पड़ता है,
इस दुनियां में क्या-क्या खोना पड़ता है,
हैरत है ये किसकी कारगुज़ारी है,
जो काटा है, फिर फिर बोना पड़ता है,
ख़ास मशक़्क़त करते हैं सब हंसने को,
और यकायक, हंस के रोना पड़ता है,
ख़ास मनाज़िर सामने आते रहते हैं,
ख़ाली दिल को रोज़ भिगोना पड़ता है
थक जाते हैं, लोग वजाहत देते हुए,
मीज़ानों पे जब जब सोना पड़ता है
उर्मिला माधव
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