सहना पड़ा

उम्र भर ग़म ही ग़म तो सहना पड़ा,
थक गए, आख़िरश ये कहना पड़ा,

अपनी मर्ज़ी की कुछ बिसात नहीं,
उसकी ख़ाहिश के साथ रहना पड़ा,

बुझती आंखों को बंद रखते हुए,
ग़म के सैलाब संग बहना पड़ा,

एक पल भी सुकून ओ चैन नहीं,
गिरती दीवार जैसा ढहना पड़ा

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