तब न अब

वो समझता था कि उसका कोई भी सानी नहीं,
ज़िन्दगी है नोहख़्वानी तब समझता था न अब,
वो कहीं पर देखता पर हम उसीको देखते थे,
आंसुओं का सुर्ख़ पानी तब समझता था न अब

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