जिनको ग़ुरूर-ए-फ़न है

जिनको ग़ुरूर-ए-फ़न है ख़ताबार हैं सभी,
कुल क़ायनात के वो गुनहगार हैं सभी,

जो ज़िन्दगी से ज़िन्दगी को हारकर चले,
वो अपनी ज़िन्दगी के सितमगार हैं सभी,

इन्सानियत की रूह से जो प्यार कर सके,
वो अपनी शख़्सियत से मिलनसार हैं सभी,

जिनका फ़रेब-ओ-मक्र में सानी न हो कोई,
घर उनके जाके देख लो ग़मख़्वार हैं सभी,

शह्र-ए-अमीर ख़ुद को समझना ही है फज़ूल,
देखो तो दिल में झाँक के बीमार हैं सभी,

हमदर्दियों के ये सभी,तालिब हैं अय हुज़ूर,
बीमार हैं प ज़ीस्त के हक़दार हैं सभी,
उर्मिला माधव
11.2.2017

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