चलते चलते हम कभी मर जाएं तो ?

चलते-चलते हम कभी मर जाएं तो?
इक ख़बर की शक़्ल में घर जाएं तो?

ज़िन्दगी का क्या है, थक जानी ही है,
इस पे घर वाले भी सब डर जाएं तो?

इस की भरपाई भी कर सकते हैं हम,
सबके दिल गर प्यार से भर जाएं तो।

कुछ भी तब होता रहे जब हम न हों,
माना इसकी फ़िक्र भी कर जाएं तो?

कुछ समय तो याद सब रहते ही हैं,
चोर या फिर मोतबर मर जाएं तो। .
उर्मिला माधव

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