बताते हुए

अच्छा लगता है ये बताते हुए,
हम भी देखेंगे तुमको आते हुए,

वो जो गुलदान तुमको भाता है,
उसको देखेंगे हम उठाते हुए

अपनी खिड़की के पर्दे बदलेंगे,
घर में घूमेंगे गुनगुनाते हुए

तुमसे बेइन्तिहा मुहब्बत है,
फिर भी शरमाएँगे जताते हुए,
उर्मिला माधव

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge