जोड़ा जा सकता है

टूटे फूटे दिल को आखिर कितना तोड़ा जा सकता है,
ग़ैर ज़रूरी वज़्न समझ कर क्या-क्या छोड़ा जा सकता है,
मंज़िल रस्ता सब मुश्किल है
तन्हाई का दौर अलग है,
इसके आगे तन्हाई को कितना जोड़ा जा सकता है...
उर्मिला माधव

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge