चलता रहा
मिलना-जुलना, आना-जाना उम्र भर चलता रहा,
एक रिश्ता दरमयाना उम्र भर चलता रहा,
कब कहाँ क्या क्या न गुज़रा याद हो आता था बस,
जब हर इक क़िस्सा पुराना उम्र भर चलता रहा,
वक़्त रुक के देख लेता जब भी हम गिनते थे ग़म
जोड़ बाक़ी और घटाना उम्र भर चलता रहा,
कब कहाँ रुकना है इसको कौन जाना है कभी,
ज़िन्दगी का ताना-बाना उम्र भर चलता रहा,
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