सितम हो रहा है
मेरे दिल पै कबसे सितम हो रहा है,
के अब सब्र मेरा भी कम हो रहा है,
लो आँखें बरसने-बरसने को आयीं,
ये दिल भी अजब है कि नम हो रहा है,
ये जी चाहता है कि मैं ख़ुद पै हंस लूँ,
खुदा से भी बढ़के सनम हो रहा है,
बहुत झुक गया है मेरा सर ज़मीं पर,
कि घर मेरा दैर-ओ-हरम हो रहा है,
तो साँसों का रुकना भी है तय शुदा ही
लो अब एड़ियों में ही दम हो रहा है....
#उर्मिलामाधव...
20.11.2014....
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