हट गए
धीरे-धीरे हम जहां से हट गए,
ज़िन्दगी के इम्तिहां से हट गए,
जब हमें दरकार थीं तन्हाईयाँ,
बस हर इक तीरो कमां से हट गए,
जब सज़ा के वास्ते तैयार थे,
जान के अम्न ओ अमां से हट गए,
दुश्मनों के क़ाफ़िलों को देख कर,
ख़ुद ही हम अपने मकां से हट गए,
जब कभी दुनियां लगी बदरंग सी,
हम हर इक सुंदर समां से हट गए,
उर्मिला माधव
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