बिछड़ने का शौक़

शौक़ है तुमको बिछड़ने का बहुत,
लो तुम्हें आज़ाद कर देते हैं हम,
जीते जी शायद ये मुमकिन हो न हो,
ज़िन्दगी के बाद कर देते हैं हम,
उर्मिला माधव

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge