आओ कभी
तुम ज़मीं पर,उतर के आओ कभी,
अपनी जानिब नज़र घुमाओ कभी,
तुम तो खुश फ़हमियों में जीते हो,
अपनी कुछ ख़ामियाँ गिनाओ कभी
जिसको देखा बुरा कहा उसको,
खुद पै भी उँगलियाँ उठाओ कभी,
बस निगेटिव ख़याल रखते हो,
ज़िन्दगी पौज़ीटिव बनाओ कभी,
ज़ह्र बातों में घोल रखते हो,
लफ़्ज़ शीरीं ज़रा मिलाओ कभी,
बातें अपनी गरज़ की करते हो,
अय ज़रा दिल भी तो मिलाओ कभी,
#उर्मिलामाधव...
16.6.2015
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