राह में
एक दिन मुझको मिला था राह में
जिसको मैने रख लिया था चाह में,
दिल शिकन है मुझको ये अहसास था,
कुछ नज़र की ही नहीं आगाह में,
मुस्कुराना रफ़्त में रख्खा ज़रूर,
ग़म तो ज़ाहिर हो गया इक आह में,
ख़ाब पर अब मुनहसिर है ज़िन्दगी,
हम कहाँ शामिल हुए उस ब्याह में,
उर्मिला माधव
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