टुकड़ा टुकड़ा

टुकड़ा-टुकड़ा हयात कौन करे
इश्क़ से दो  दो हाथ कौन  करे

प्यार करना था करके देख लिया
फिर   नई   वारदात   कौन  करे

जब कि ये तयशुदा है मरना है
फिर कोई हासिलात कौन करे

सोना जगना भी ग़ैर के हाथों
रोज़ यूं ग़म की रात कौन करे

#उर्मिला_माधव

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