किया करते हैं हम
तनहाई में बात किया करते हैं हम,
बस यादों के साथ जिया करते हैं हम,
इतनी भीड़ जमा रहती है किस्सों की,
इनको ही दिन रात दिया करते हैं हम,
यहां किसीकी कोई ज़रूरत है ही कब,
प्यार सनम का याद किया करते हैं हम,
सहरा में भी दरया का अहसास रहे,
अश्कों की बरसात पिया करते हैं हम,
महफ़िल की शिरक़त भी भारी लगती है,
ख़ल्वत को ख़िदमात दिया करते हैं हम,
उर्मिला माधव
20.2.2020
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