राबितों के उसने जो मानी

राबितों के उसने जो मानी हमें समझा दिए,
दिल के टुकड़े करके हमने क़ब्र में दफ़ना दिए,

नाख़ुदा उसको कहा ऑ हो गए हम ख़ुद हक़ीर,
हमने अपनी सोहबत के हौसले दिखला दिए,

क्या कमी थी बंदगी में ये बता बंदानवाज़,
तूने जो इलज़ाम के तोहफ़े हमें पकड़ा दिए

तंग इतनी हो गई झोली तेरी परवर दिगार,
हैफ़,इज़्ज़त के जनाज़े पाँव से ठुकरा दिए,

तेरी चौखट पर झुके है,इसके ये मानी नहीं,
गम के शोले जिसने चाहा ज़ीस्त में भड़का दिए,

हम न बदलेंगे कभी ये अपना शाहाना मिज़ाज
सुन सरे महफ़िल इरादे हमने।भी बतला दिए...
उर्मिला माधव..

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