क्या ख़बर तुझको क्या हक़ीक़त है
क्या ख़बर तुझको,क्या हकीक़त है,
ज़िन्दगी ......मौत की ही आहट है,
यूँ मयस्सर हज़ार खुशियाँ हैं ,
पर कहीं इसमें कुछ मिलावट है,
मिलने वाले हज़ार मिलते हैं,
वो नहीं,जिसकी हमको चाहत है,
राम कहले रहीम कह ले पर,
रोज़-ए-महशर असल इबादत है,
एक तमाशा है जिंदगानी भी
जिसकी खातिर अज़ीम शिद्दत है,
जो न पैदा अगर हुआ होता,
कौन कहता के चल बुलाहट है?
#उर्मिलामाधव..
7.12.2015
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