ख़्वाब सजाना आता है

मुझको ग़म में ख़्वाब सजाना आता है,
उल्फ़त का दस्तूर निभाना आता है,

कोई साज़िश रचके रुसवा ख़ूब करे,
आगे बढ़कर प्यार दिखाना आता है,

फ़र्क़ समझना आजाता है पल भर में,
हंस हंस के हर बात भुलाना आता है,

चश्म-ए-गिरियाँ पलकों में ही रहते हैं,
ग़म का हर सैलाब छुपाना आता है,

तहज़ीबें महदूद मुझे कर देती हैं,
मुझको भी सुर्ख़ाब उड़ाना आता है...
उर्मिला माधव...
2.12.2016..

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge