चूँ चूँ का मुरब्बा

चूं-चूं का मुरब्बा...😊😊😊

अपने ही ढर्रे पे जीना सीखो यार,
वरना जितना चाहो उतना झींको यार,

आसमान पर उड़ते ही तो रहते हो,
नीचे भी तो कभी-कभी तुम दीखो यार,

के हो गयो, क्यूँ थारी जुल्फां बिखरीं,
थारे मुंह को घणो रंग है फीको यार,

कित्थे-कित्थे फिरदे रैन्दे हो पाजी,
रोउन्न लागी त्वाड्डी प्यारी प्रीतो यार,

सब के सब बुध्धू तो घर को लौट गए,
हम क्यों भूलें अपने घर की गली को यार.. 😊
उर्मिला माधव
15.12.2017

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