deewali
न जाने किस जगह जा कर छुपी है अब वो दीवाली,
चरागाँ जब दर-ओ-दीवार होते थे हर इक घर के,
मुहब्बत से भरे होते थे रिश्ते .....जब वो पीहर के,
ज़रा सी बात पर खुशियां,नज़र आती थीं चेहरे पर,
कभी अम्मा से छुप के पंख भी चुनते थे तीतर के,
मगर मज़हब की कालिख़ से हर इक दीवार है काली,
न जाने किस जगह जा कर छुपी है अब वो दीवाली,
उर्मिला माधव...
31.10.2016
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