मनाही नहीं सूरत देखने की फ्री वर्स
मनाही नहीं,सूरत देखने की,
पर इसे पढ़ना भी है
दिल से नहीं
दिमाग़ से,
कितने फरेब लिखे हैं
मुश्किल है
ऐसे चेहरों की
इबारत पढ़ना
सूरत जितनी दिलकश,
उतनी उलझी हुई इबारत,
तुमने सुना भी होगा सखी?
ऑल दैट ग्लिटर्स इज़ नॉट गोल्ड
यानि हर चमकने वाली चीज़
सोना नहीं
इसलिए ख़ुद को खोना नहीं
कितने सुहाने लगते हैं
दूर के ढोल,
पर पास जाकर सुनना कभी
कान तो क्या,
दिलो दिमाग़ भी हिल जाएंगे
रोज़ पढ़ती हूँ मैं उस चमकीली सूरत को
रोज़ लड़ती हूँ अपने आप से,
उस चेहरे से रोज़ाना
मेरे दिल की दूरी
कुछ और बढ़ जाती है
फ़रेब उसका रोज़ ही
कुछ और ज़ियादा दिखाई देता है
ये खरा सच है उस सूरत के हिस्से का
जो जानना ज़रूरी है,तुम्हारे लिए,
ये जो दूरी है,अच्छी है तुम्हारे लिए
सूरत खुश है, फ़रेब रचकर,
और मैं, उस पर हंस कर
उसकी आदत में शामिल है,
मुझे कम से कम करके आंकना
उसी सूरत की बाबत है ये सब
जो अचानक ही तुम्हारे मन को
बहुत भा गई है
दूरियां सुहानी हैं
इन्हें क़ायम रहने दो
वरना ऐसी नज़दीकियां
इनका कोई मुस्तक़बिल नहीं
सिर्फ़ सूरत ही सूरत है
सीरत का नामो निशान नहीं
मन से हारना तो मैंने कभी
सीखा ही नहीं
और कहा हमेशा मजबूती से
एकला चालो रे.....
तुम भी सीख लो....
अकेले चलना...
उर्मिला माधव
27.10.2015
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