चूर जिंदगी
सीने में जलन,थक के हुयी चूर ज़िन्दगी,
देखी कहाँ है आज तक पुर नूर ज़िन्दगी,
वो कौन सी जगह है जहाँ हम भी हंस सकें,
खुशियों से रंगा-रंग हो भरपूर ज़िन्दगी,
कितने दिलों में बच रहा तूफ़ान प्यार का,
कितनों को रास आ गई मग़रूर ज़िंदगी....
जब भी उठाये हाथ हैं कुछ मांगने को आह
मिल तो गयी है ज़िन्दगी रंजूर ज़िन्दगी,
जीने की आरज़ू में बहुत दिन गुज़र गए,
अब ले भी जाओ मुझसे बहुत दूर ज़िन्दगी,
#उर्मिलामाधव...
२९.१०.२०१३.
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