बाबा की बैठक

सहेलियों,
आगे बाद में 😢

बाबा की बैठक,
अम्मा की रसोई,
बाबुल की देहरी,
सब में एक आड़ होगई,
वो देहरी पहाड़ होगई,

घर का वो जीना,
चढ़ें आवै न पसीना
हर इक महीना जैसे,
सावन का महीना,
सब में एक आड़ होगई,
वो देहरी पहाड़ हो गई,

सांझ भई आंगन में,
खटिया बिछा बिटिया,
नानी बगल जाकें,
पानी की रख लुटिया,
सब में एक आड़ होगई,
वो देहरी पहाड़ हो गई,

सूनी दुपहरिया में,
गलियों के कई चक्कर,
भैया से मुठभेड़,
होनी ही थी टक्कर,
 सब में एक आड़ हो गई,
वो देहरी पहाड़ हो गई,

चुन्नी की दुनियां में 
फ़्रॉक हो गई हवा,
यौवन की देहरी पे,
चुन्नी ही थी गवा(ह),

सब में एक आड़ हो गई,
वो देहरी पहाड़ हो गई,

गलियों पे पाबंदी,
हंसने पे पाबंदी,
गाने पे पाबन्दी,
नस-नस पे पाबंदी,

पर सब पे आड़ हो गई,
वो देहरी पहाड़ हो गई,
उर्मिला माधव,
26.10.2017

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