ज़िन्दगी धोका न खाना
मैं तुम्हें भी छोड़ दूँगी,ज़िन्दगी धोका न खाना,
चाहे कुछ कहती रहूँ मैं..मेरी बातों मैं न आना,
देखते ही देखते मैं अलविदा कह दूंगी तुमको,
भूल जाओगी हमेशा के लिए तुम आना-जाना,
चंद साँसों के लिए अहसान सा करती रही हो,
तुम बताओ देख पाया कौन ये सपना सुहाना?
लोग आपस मैं मुहब्बत करते हैं वादों के साथ,
उनके होठों से हमेशा...छीनती तुम मुस्कुराना,
इसलिए कहती हूँ तुमसे,छोड़ दो जलवे दिखाना,
सिर्फ तुम दुश्मन जहाँ मैं,जानता सारा ज़माना...
उर्मिला माधव...
13.10.2013...
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