aankh ke niche ki kaali jhaainyan
आँख के नीचे की काली झाइयां,
और सारी उम्र की तन्हाईयाँ
घेरती हैं अब सवालों से मुझे,
आज गुज़रे वक़्त की परछाईयाँ,
यूँ भी कहते ही नहीं बनता है कुछ,
जब ये मुझमें खोजें हैं रानाईयाँ,
जो भी गुज़रा हो मगर इतना रहा,
ज़िन्दगी ने नाप लीं गहराइयाँ ,
पाँव तो हर दम ज़मीं पर ही रहे
चश्म-ए-नम से देख लीं ऊँचाइयाँ,
दिल मेरा अनहद कहीं सुनता रहा
दूर कुछ बजती रहीं शहनाइयाँ ----
#उर्मिलामाधव...
31.10.2015
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