ढोलक की थाप

ढोलक की थाप,
सोहर गाने की आवाज़,
किन्नरों के  समूह का नृत्य,
पर थाप से उठती हुई 
उदासी की परछाइयां,
देख सकती हूं मैं,दूर तक,
क्या है ये?
हतप्रभ होता हुआ मन,
ढोलक की आवाज़ में
नीरवता की झलक,
क्या है ये ?
भय लगता है मुझे,
अपनी अनुभूतियों से,
विचित्र दिव्य दृष्टि है,
जो केवल सुनाई देना चाहिए,
वो क्यों देता है दिखाई,
आकुल-व्याकुल से मुख,
परिलक्षित होते से,
विचित्र दृश्य,
क्या है ये ?
आंधकार से घिरी सी हवाएं,
किसीके द्वार का एक किवाड़,
हवा में आगे पीछे को झूलता हुआ,
देता है दिखाई,
क्या है ये ?
अंतिम सांस लेती हुईं,
सीढ़ियों पर पदचाप,
समस्त कोलाहल का अंत,
बुद्धम, शरणम, गच्छामि..
उर्मिला माधव,
29.9.2017

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