बदलना होगा

अब तो हर ख़ाब का नक्शा ही बदलना होगा,
हर तख़य्युल को सर-ए-शाम ही ढलना होगा,

ज़ेर-ए-जज़्बात है हर बात चुभी नश्तर सी,
यूँ के ज़ख़्मों पे नमक, आप ही मलना होगा,
उर्मिला माधव
24.7.2018

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