लाहौर वाले

याद तुमको कर रही हूँ, अय मियां लाहौर वाले,
आज तक भी सब खड़े हैं, दरमियां लाहौर वाले,

तुमने लानत भेज दी जब ज़िन्दग़ी को हार कर,
अब भला किस काम की ये अदवियां लाहौर वाले,

अब न तुम ही हो न कोई भी महकती शाम है,
खोल दें या बंद रख्खें, खिड़कियां लाहौर वाले
उर्मिला माधव

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