फिर भी

एक पल की नहीं ख़बर फिर भी
हमको लगता नहीं है डर,फिर भी,

दम ब दम इम्तिहान देते हुए,
पूरा करना ही है सफ़र, फिर भी,

दह्र इंसां की इक कसौटी है,
उसपे टूटा हुआ हो घर फिर भी,

यूं ही हँसके निबाह करना है,
चाहे थक जाए ये नज़र फिर भी,

हमसे लाखों गुनाह हो जाएं,
बंद होता नहीं ये दर, फिर भी,
उर्मिला माधव

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