ताक़ पर

क्या कहें हालात को, तहज़ीब रक्खी ताक़ पर,
रंग में कालक मिलाई और घुमाया चाक़ पर 

दिल में लाखों मैल लेकर,दिल मिलाने आगये,
बे-हयाई का चलन है समझें हैं बेबाक़ पर....

अब वो रंगा-रंग जैसा होलियों का रंग कहाँ,
रंग थे होली के गाढ़े,दिल बहुत शफ्फाक़,पर ....

वो सुरीले फाग के रंग वो मुग़न्नी अब कहाँ,
कौन है बाक़ी मुनक़्क़ीद,ख्वाहिशे,मुश्ताक़ पर,

लोग जो जीते थे,ज़ात-ए-किब्रिया के वास्ते,
जान दे जाते हैं आख़िर अब हुजूम-ए- शाक़ पर....
#उर्मिला माधव....
24.2.2015....

शाक़--- मुश्किल 
मुनक़्क़ीद---कद्रदान 
मुश्ताक़-----अभिलाषी,उत्सुक
मुग़न्नी----- गायक

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