कहानी...अम्मा

रोज़ाना सुबह नींद टूट जाती थी, अम्मा के भजन गाने की आवाज़ से, आज नींद नहीं टूटी शायद अम्मा गा नहीं रही थीं, मुझे लगा कि शायद मैं सुन नहीं सका।
ख़ैर बिस्तर से उठना तो था ही सो उठ गया लेकिन जो देखा वो हृदय विदारक था, 3 बजे उठ जाने वाली अम्मा अभी तक सोई हुई थीं मुझे बहुत आश्चर्य हुआ तो मैं अम्मा को उठाने गया, लेकिन अम्मा सो गई थीं कभी न उठने के लिए और मैं खड़ा रह गया मौन विस्मृत, हर बात अम्मा से साझा करता था लेकिन ये बात किससे साझा करता सो फ़ैसला किया, परवरदिगार से कहने का, मैं बोला, तुम तो जानते थे न मेरी तो केवल अम्मा ही थी, तुम्हारी तरह मेरे पास पूरी दुनिया थोड़े ही थी, मैं 18 साल का लड़का क्या करूंगा और कुछ भी करूंगा तो अम्मा तो नहीं तो नहीं देखेंगी न, घर वाले(दादी बाबा, नानी नाना और दुनियां भर के लोग) तो कभी मेरे साथ नहीं थे, अम्मा को कभी किसीका ज़िक्र करते नहीं सुना था सो वो लोग कैसे थे, मैं नहीं जानता था ।।
      अम्मा किसी डिग्री कॉलेज में प्रोफ़ेसर थीं, सो उनको अच्छी तनख़ाह मिलती थी, कभी आर्थिक संकट जाना नहीं क्या उनकी सेविंग थी मुझे नहीं पता था, लेकिन पास पड़ोस में मेरी अम्मा अत्यंत लोकप्रिय थीं, जब पड़ोसियों ने अम्मा को कॉलेज के लिए नहीं देखा तो कुछ लोग पूछने ही चले आए कि आज छुट्टी का दिन तो था नहीं फिर अम्मा बाहर दुकान वाले भैया से दूध नहीं लाई थीं, सब्ज़ी जो कि रिज ताज़ा लेती थीं, नहीं ले थीं सो अचरज की बात थी तो लोग देखने चले आए, देखते ही देखते घर में भीड़ हो गई और लोग अम्मा को अर्थी की शक़्ल में उठा ले गए और मुझे मुखाग्नि देनेको विवश किया जाने लगा लेकिन मैं अपनी अम्मा के साथ ऐसा नहीं कर सकता था सो चीख़ चीख़ कर रोने लगा समझ नहीं पा रहा था मैं क्या करूँ फिर किसीके सहारे से जबरन ये काम मुझसे करवाया गया और मैं उसके बाद हमेशा के लिए मौन हो गया, पढ़ता लिखता रहा, सीमित बातचीत और अपनी पढ़ाई, इसके इलावा कौन खाना देता, कौन बुख़ार ताप में ध्यान देता ख़ैर जिस तरह मुखाग्नि दिलवाई गई उसी तरह पकड़ कर शादी करा दी गई, साधना बहुत अच्छी इंसान थी दो मेरे जोडम जोड़ खड़ी रहती, कभी कोई सवाल नहीं किया और हर चंद मेरा ध्यान रखा...
  अचानक एक दिन सुबह अम्मा के गाने की आवाज़ आई तो मैं बिजली की फ़ुर्ती से उठ कर भागा तो देखा, साधना अम्मा की तरह गा रही थी और वो भी अम्मा का भजन, बहुत देर मैं समझने की कोशिश करता रहा ये कैसे हो सकता था ख़ैर जब साधना के पास पहुंचा तो देखा कि वो अम्मा की भजन की कॉपी से देख कर गा रही थी।।
  ख़ैर अम्मा की जगह तो कोई नहीं के सकता था पर मैं उसके स्नेह का अनादर नहीं कर सकता था और सोचने लगा कि अब सवेरा तो हो जाया करेगा....
उर्मिला माधव

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