एक तरफ़
है तेरी ख़ुदाई एक तरफ़,लैला का भाई एक तरफ़,
तू ख़ास ख़ुदा, जा मान लिया,पर हम हरजाई एक तरफ़,
हम सब पे दुनिया हंसती है,अब हरि परसाई एक तरफ़,
हम हाथ मिला कर पाटेंगे,मज़हब की खाई एक तरफ़,
अपनी बारात तो निकलेगी,ग़म से कुड़माई एक तरफ़,
हम रोज़ हिसाबां करते हैं, सब पाई-पाई एक तरफ़,
जो तुमने हमको बख़्शी है,दामन की काई एक तरफ़,
हम सब हरजाई एक तरफ़,जा तेरी ख़ुदाई एक तरफ़,
जा तेरी ख़ुदाई एक तरफ़..
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment