जाहिल हो गई
आपसे जब ये मुकाबिल हो गई,
जिंदगानी और मुश्किल हो गई,
चुपके-चुपके रोना,कहना कुछ नहीं,
एक नई ख़ूबी ये हासिल हो गई,
किस तरह तय होंगी इतनी दूरियां,
चलते-चलते रूह बिस्मिल हो गई,
आपकी हो दीद,ये ख्वाहिश शदीद,
जाने कब से मुझमें शामिल हो गई
तंज़ करती इश्क़ की ताबीर पर,
देख लीजे दुनियां,जाहिल हो गई....
उर्मिला माधव
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