ज़ख़्म ताज़ा ही है, भरा तो नहीं
ज़ख़्म ताज़ा ही है,भरा तो नहीं,
हादसा ये भी कुछ नया तो नहीं,
दिल को आदत है,याद रखने की,
आपसे फिर भी कुछ कहा तो नहीं,
चश्म-ए-गिरया ने आँख धो डाली,
क्या हुआ इसमें कुछ गया तो नहीं,
जो भी हो मुद्दआ तो ख़त्म हुआ,
इसके आगे का सिलसिला तो नहीं,
आख़री वक़्त है,गिला क्यों हो ?
हौसला अब भी है मरा तो नहीं
उर्मिला माधव..
9.12.2016
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