कांटों से जुमला

लिखा हमने फूलों पे काँटों से जुमला,
चुभन कैसी लगती है तुमको?बताना,

जो लफ़्ज़ों से अब तक निकलती रही है,
जलन कैसी लगती है तुमको??बताना ,

फिजाओं मैं उठता धुंआ भी तो होगा ??
घुटन कैसी लगती है तुमको?बताना ,

जो शम्मा अभी तक सिरहाने जली है,
तपन कैसी लगती है तुमको??बताना

जो छाले.......हजारों की तादाद मैं थे,
सडन कैसी लगती है तुमको??बताना....
उर्मिला माधव...
२८.९.२०१३

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