बीमार कर गए
उफ़ ज़िन्दगी के मरहले बीमार कर गए ,
ये सीखने को हम भी मगर दार पर गए ,
दामन में सिर्फ कांटे हैं और आबला-ए-पा,
रस्ता बहुत कठिन था मगर पार कर गए ,
कुछ आरज़ू थी,कुछ थे इरादे बहुत बड़े ,
कुछ रास्ते के गम मुझे खुद्दार कर गए ,
सब लोग क्या कहेंगे यही डर बहुत रहा ,
क्या-क्या सुनेंगे हम जो अगर हार कर गए ...
किसको अज़ीज़ होगी कहो ये अज़ल की राह,
हम से ही सिर फिरे हैं ,जिगर वार कर गए ...
उर्मिला माधव ...
१४.९.२०१३
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