एक मतला

क्या ही बेहतर हो उतारें,दिल से अब बार-ए-मुहब्बत,
कब तलक सजदा करें यूँ तुझको हम दार-ए-मुहब्बत..
उर्मिला माधव..
7.9.2016

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