आशनाई न थी
नसीर तुराबी की तर्ज़ पर---
बराए नाम था वो,उससे आशनाई न थी,
ये बात हमने किसीको कभी बताई न थी,
फ़रेब देके कई बार उसने देख लिया,
मगर ये ज़ीस्त ज़रा सी भी डगमगाई न थी,
जब उसके दिल ने कहा उसने फिर पुकारा हमें,
अजीब ज़िद सी रही हम में एक रसाई न थी,
वो मेरे शहर में आ आ के लौट जाता रहा,
कभी मिलेंगे नहीं ये कसम भी खाई न थी
उर्मिला माधव
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