रिसाले देखना
जब कभी पिछले रिसाले देखना,
हंसने वालों के भी छाले देखना,
मुस्कुराहट पर फ़क़त जाना नहीं,
हो सके तो आह-ओ-नाले देखना,
महफ़िलों औ-क़ह्क़हों के शोर में,
आंसुओं वाले......निवाले देखना,
कुछ फ़सीलें तो झड़ी होंगी मगर,
रंग पर्दों के निराले.........देखना,
बिन चरागों के वहीँ मिल जायेंगे,
जाके उनके घर के आले देखना....
उर्मिला माधव....
19.9.2014
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