एक मतला दो शेर

जो तमाशा है....उम्र भर का है,
ये ही किस्सा हर एक घर का है,

आज तक भी ये राज़ लगता है,
बाद मरने के...ये किधर का है ?

मेरे जगते ही......रूह जग जाए,
मुन्तजिर दिल उसी सहर का है 
उर्मिला माधव...

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