सुनाया है

कभी शेर-ओ-सुखन अपना कभी नगमा सुनाया है,
असल में इन तरीकों से ब-मुश्किल ग़म छुपाया है...

रखा पास-ए-अदब मैंने,सभी अहबाब की खातिर,
कलेजा देख लो मेरा,....नशेमन तक जलाया है...

हज़ारों रंग देखे हैं मेरी नज़रों ने घबरा कर,
मगर दिल ने मुझे जबरन बहकने से बचाया है...

अजब ये दोगली दुनियां,ग़ज़ब है दिल का भोला पन
बहुत कुछ फैसले करके ........क़दम पीछे हटाया है...

किसीके साथ क्या चलना,मैं तनहा ही भली हूँ बस
ये मेरा ख़ास मुस्तक़बिल है .....मैंने ख़ुद बनाया है।।।
उर्मिला माधव....
24.8.2015...

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