अजब ज़ंजीर है
जो तुम्हारी ख़ास इक तस्वीर है,
वो मेरे दिल की अजब ज़ंजीर है,
वो मुझे अपनी सी लगती है सुनो,
उसकी सीरत इन्तेहाई शीर है,
बिन तुम्हारे दिल बहुत बेचैन था,
ये महज़ बिछड़े समय की पीर है,
रात दिन बाबत तुम्हारे सोचना,
क्यूँ मेरे दिल पै रखी शमशीर है,
लौट कर आना है उनको या नहीं,
क्या ख़बर है क्या मेरी तक़दीर है,...
#उर्मिलामाधव...
11.7.2015
Comments
Post a Comment