सकपकाहट

कान लगा कर सुनते रहते हैं वो मेरे पांव की आहट,
दिल के अंदर ग़म ही ग़म है बाहर रहती मुस्कराहट,

छुपके मेरी तस्वीरों से ............बातें करते रहते हैं वो 
मगर देखते ही बनती है कभी-कभी की सकपकाहट,
उर्मिला माधव..
11.7.2016

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