मुहब्बत है
तू मेरी आख़री मुहब्बत है,
ज़िन्दगी तू है,तू इबादत है,
रु ब रु हो मिरी निगाहों के,
तुझको छू लूँ अज़ीम शिद्दत है,
मेरी ख़ाहिश हैं,तेरे रूह-ओ-जिगर,
कब तेरा जिस्म मेरी चाहत है ?
मुझपे क़ाबिज़ है तेरी हुस्न-ए-नज़र,
तुझको देखूं ये मेरी आदत है,
तू भी छुप जाए है कभी मुझ से,
ये तेरी ख़ास इक शरारत है,
तुझको देखे जो ग़ैर नज़्र कोई,
फिर तो उस शख़्स से बगावत है..
उर्मिला माधव,
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