ताब रखते हैं
हम तख़य्युल की ताब रखते हैं,
अपने दिल में ही ख़ाब रखते हैं,
ज़ख्म-ए-उल्फ़त के सब सवालों का,
हर मुक़म्मल जवाब रखते हैं,
दिल कभी टूट कर न रोये कहीं,
क़तरा-क़तरा हिसाब रखते हैं..
मुसकराते हैं ज़ेरे लब हर दम,
दिल में लाखों अज़ाब रखते हैं,
ज़िन्दगी चूँकि तुझको जीना है,
खुद ही खाना ख़राब रखते हैं,
मौत दावा करेगी क्या हम पर,
जिसको हम इन्तिख़ाब रखते हैं,
उर्मिला माधव
10.4.2018
Comments
Post a Comment