पैदा हुई है

ख़ुश्क आंखों में ......नमी पैदा हुई है,
एक चाहत आज तक भी छुइ-मुई है,
इक मेरा ऐजाज़ था जो तू न समझा,
अब तलक भी देख ....पर्दा-ए-दुई है,
उर्मिला माधव,
18.4.2017

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